SWATANTRA...SOCH

All religions, arts and sciences are branches of the same tree. All these aspirations are directed toward ennobling man's life, lifting it from the sphere of mere physical existence and leading the individual towards freedom.No one should negotiate their dreams. Dreams must be free to flee and fly high.

  • About This Blog

    This blog contains poems written by me on different topics and with different essence everytime, along with photographs shot by me during various trips in India and UK containing macros, sceneries, urban and rural shots, I hope this blog will serve you with a range of variety and you will enjoy my work.



ज़िन्दगी में खुशियों की घटा फिर से छायीं हैं
सैलाब कैसा ये हवाएं  ले के आयीं हैं
मैं तो बिखर चुका था भंवर मैं अतीत के 
ये बहारें कहाँ से मुझे समेट लायी हैं 


ख़ाक मैं मिल जाने को हम तैयार थे लेकिन
चिता को बारिश की बूँदें बुझा आयीं हैं
इस डर से कि  ना खो जाऊं फिर कहीं दुनिया कि भीड़ में
अपनों कि दुआएं मेरी पहचान लायीं हैं





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Urban and ancient architecture.......

Posted by Priyanka Telang On 4:15 AM 1 comments

Here are some shots from Heritage city Edinburgh of Scotland....and London during my visit

Edinburgh City architecture.......


View of London from Greenwich, London

seems like a place from Harry Potter's story....this is Princess street Edinburgh, Scotland....

House of parliament...Westminister street , London

View from Tower Bridge London...
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आत्म- निर्भरता

Posted by Priyanka Telang On 3:50 AM 4 comments


मैं स्वयं पर निर्भर करता हूँ
अंगारों के पथ पर चलता हूँ

इस माया के संसार में मुझको
क्या खोना क्या पाना है ?
मैं खुश हूँ अपने आप मैं ही
ना ओरों की होड़ में करता हूँ..................

निकला हूँ एक तलाश पे मैं
जो डूब गया उसे पाने की
इस जीवन के तम् मार्ग पे मैं
सूरज को खोजा करता हूँ................

मैंने अपनी इन आँखों से
लोगों को बदलते देखा है
वो कहते हैं मुझको बागी
जब अपनी मर्ज़ी से चलता हूँ.................

तुम चाहो मुझको अपना लो
तुम चाहो मुझको ठुकरा दो
टिकता ही नहीं एक रात कहीं
पल पल मैं दिशा बदलता हूँ................

कुछ कहते हैं मुझको पागल
कुछ कहते हैं दीवाना हूँ में
इस कारण जलते हैं मुझसे
की जो चाहता हूँ कर गुज़रता हूँ...............

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जीने की तमन्ना थी, जो तुम साथ मैं लेकर चले गए
जो बात जुबां से कहनी थी आँखों से कह के चले गए


जब छोडा है मुझको तनहा तो ख़्वाबों मैं क्यूँ आते हो
दिन रात मेरी खामोशी का किसलिए मज़ाक उडाते हो


जो राज़ छुपाया था हमने तुम समाचार बनाके चले गए
हमने तोः पायी रुसवाई तुम नाम कमा कर चले गए


अपने दिल के बिखरे अरमान हमने अश्कों से धुलवाए हैं
तुम क्या समझो इस आलम को अपने भी काम ना आये हैं


जो हम से ताल्लुक रखते थे वो भी कतरा के चले गए
जीवन मैं अँधेरा छाया है उजाले तो कभी के चले गए




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Some shots of Macros.....

Posted by Priyanka Telang On 6:22 AM 0 comments

English roses........

Daisy....at my home in Manchester.
Purple.....
Night Shot
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Introduction with truth.....

Posted by Priyanka Telang On 10:08 AM 2 comments



he doesn't love me anymore
and thats the irony my life bore ................

his love for me was a short term affair
and this lead my life to great dispair............

I longed to be loved for years
but what I got was only tears.......

life is no truth n no lie
the fact is same that all will die..........

I was born to achieve but lost everything
the battle of life is hard to win........

surrender yourself with no desires
but unconditional love no one admires.......

why the feelings cripple in heart?
why we always fall and depart?.....

trying to learn the lesson after every while
am I the one who will suffer every mile?........

why my expressions are always mistaken?
may be the destiny is already written......

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जाने क्या एक दिन हमारे मन मैं आई
कि दिल ने हास्य कविता लिखने की इच्छा जताई
सोचा की किस विषय को आधार बनायें
तो याद आई देश की बढती महंगाई

लिखने के लिए कलम उठाया
तो उस पर पारकर लिखा पाया
सोचा इसकी स्याही व्यर्थ नहीं गँवायेंगे
हम साधारण पेंसिल से ही काम चलाएंगे

लिखने को पन्ने उठाये
तो मेरे भाई बहन दोनों चिल्लाये
दीदी यह क्या करती हो A4 sheet कंप्यूटर
के लिए है इसे क्यूँ ख़राब करती हो

मैं बोली एक अदद पन्ने से तुम्हारा क्या जाएगा
इस बहाने मेरे विचारों को आधार तो मिल जाएगा
पलट के जवाब आया विचारों के पैसे थोड़े ही लगते हैं
पर यह पन्ने महंगे हैं मुफ्त मैं नहीं मिलते हैं

मैं थोडा जुन्झ्लाई ,मगर फिर मुस्कुराई
एक पद ही लिखा था की मुझे प्यास लग आई
मैं गयी रसोई को और लौट के आई
देखा की पिताश्री कक्ष मैं पधारे हैं
और मेरे लिखे पन्ने पे मां से हिसाब लिखवा रहे हैं

अब मेरी सहन शक्ति का बाँध टूट गया
लिखने चली थी हास्य कविता और रोना छूट गया
मन मैं ठाना की अब कभी
हास्य कविता के लिए कलम नहीं उठाऊंगी
मां बोली तू दुखी क्यूँ होती है
तेरा विवाह हास्य कवी से ही करवाऊंगी


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Few pics from Scotland

Posted by Priyanka Telang On 12:03 AM 1 comments

Just adding few pics from Scotland Kyle of lochlash and Lake district, England I had a trip to this beautiful scenic place this year.......I would like to share some photographs....hope you like them....
.

Lake district, Cruise Ride.....the finger is pointing to a castle on the land.....


Grasmere Lakes....blue and green colour dominate the Pic

The green effect.....Grasmere lake bird's eye view....


Stream at Cumbria....

Flora pass.....a beautiful gate way formed by trees.....


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