SWATANTRA...SOCH

All religions, arts and sciences are branches of the same tree. All these aspirations are directed toward ennobling man's life, lifting it from the sphere of mere physical existence and leading the individual towards freedom.No one should negotiate their dreams. Dreams must be free to flee and fly high.

  • About This Blog

    This blog contains poems written by me on different topics and with different essence everytime, along with photographs shot by me during various trips in India and UK containing macros, sceneries, urban and rural shots, I hope this blog will serve you with a range of variety and you will enjoy my work.



मेरी  मंजिल  के  सफ़र  तक  सिर्फ  मेरी  तनहाई  थी 
मेरी  हमसफ़र  कोई  और  नहीं .. मेरी  परछाई  थी .... 

चल  पडा  था  ढूढने .....  अपना  ठिकाना 
ना  साथी , ना  राहबर , न...  कोई  बेगाना 
धुंधली सी  एक  रूह...  मेरे  पीछे  पीछे  आई  थी 
जो  देखा  तो  जाना...  वो  मेरी...  परछाई  थी ....

मैंने  फ़िक्र  नहीं  की .. चाहे  ग़म  हो  या  ख़ुशी ..
मुझे  हर  आशना  मिला .... जैसे  कोई  अजनबी ..
पर खलवत  मैं  भी  जैसे  किसी  ने  आवाज़  लगायी  थी 
में  पलटा  तो  देखा ... वो  मेरी  परछाई  थी ....

फिर  वो  मुकाम  आया , सब  खोया  जो  था  पाया 
मैं   रोया  चिल्लाया , पर  कोई  भी  ना  आया ...
जब  घोर  अंधेरा  था ... और  वीरानी  सी  छाई  थी 
वहीँ  पे  खड़ी  थी .. वो  मेरी  परछाई  थी ...


कभी  गिरा  कभी  दौड़ा , कभी  ठहर  गया  थोड़ा
बड़ी  अज़ीयत  मैं  भी ... मैंने  हौसला  न  छोड़ा ...
अपने आप  ही  मैंने  नदामत  की  दिवार  गिराई  थी 
जो  साथ  थी  मेरे  हरदम .. वो मेरी  परछाई  थी 

अब दिन संवर गए हैं... मौसम बदल गए हैं
सारवत के हमारी अब .. आलम नए नए हैं 
मेरी बरक़त को देख... वो  होले से मुस्कुराई थी
कोई ओर नहीं............ वो मेरी परछाई थी 

आशना - acquaintance 
खलवत - Solitude, Isolation
अज़ीयत- Trouble, Difficulty
नदामत - Guilt, Regret, Repentance
सारवत - wealth, prosperity

Urban shots....

Posted by Priyanka Telang On 4:20 AM 2 comments

Few shots of London and Scotland.... 



अब  कभी  आँगन  में  मेरे  धूप  ना  होगी
कोई  भी  ख़ुशी  अब  मुझे  महसूस  ना  होगी ................
चेहरे  से  झलकती  है दास्तान -ए -मोहब्बत
हालत  मेरी  पूछने  की  ज़रुरत  भी  ना  होगी .................................




कुछ  भी  ना  सही  उम्र  भर  बस  ये  ख्याल  हो
की  उनकी  भी  आँखों  में  नमी  थी  मेरे  लिए .............
हर  अश्क  लुटा  देंगे  हम  उनकी  हंसी  पर
खालिश  जो  दफ़न  है  कभी  पैदा  ही  ना  होगी ..................




दास्ताने वफ़ा  कौन  भला  हमको  कहेगा
जीकर  भी  जिन्दा  कोई  ना ...अब  हमको  कहेगा ..............
मौत  ने  भी  रुख  है  मोड़  लिया  इस  ख्याल  से
की  जो  अंदर  से  मर  चुका  है  उसकी  मौत  क्या  होगी ..................

RAASLEEA

Posted by Priyanka Telang On 2:25 AM 1 comments

Few pics from Holi Raasleela Vrindavan..........ENJOY.