SWATANTRA...SOCH

All religions, arts and sciences are branches of the same tree. All these aspirations are directed toward ennobling man's life, lifting it from the sphere of mere physical existence and leading the individual towards freedom.No one should negotiate their dreams. Dreams must be free to flee and fly high.

  • About This Blog

    This blog contains poems written by me on different topics and with different essence everytime, along with photographs shot by me during various trips in India and UK containing macros, sceneries, urban and rural shots, I hope this blog will serve you with a range of variety and you will enjoy my work.




राह  मैं  यूँ  बढ़ता  जा  रहा  हूँ
मैं  असलियत  को  झुठला  रहा  हूँ ...........

कठिनाइयाँ  होती  हैं  उन्नति  के  पथ  पर
मैं  आसानियाँ  क्यों  चाह  रहा  हूँ ................

संघर्षों  से  ही  मिलता  है किनारा
तूफानों  से  फिर  क्यों  मैं  घबरा  रहा  हूँ .................

मुनासिब  नहीं  हर  कोई  हो  मसीहा
उम्मीदें  सभी  से  क्यों  लगा  रहा  हूँ .................

यह  जीवन  है  आग  का  एक  दरिया
में  इस  से  बच  के  किधर  जा  रहा  हूँ ......................

पिछड़ा  हूँ  अपने  ही  साथियों  से
अब  अजनबियों  से  यारी  बढ़ा  रहा  हूँ ................

इस भीड़ मैं  हो  गया  हूँ  तनहा
खुद  से  ही  बातें  किये  जा  रहा  हूँ ................................

जब  से  दुनिया  आई  है  समझ  मैं
दुनिया  से  में  दूरी  बढ़ा  रहा  हूँ .................

Reactions: 

5 Response for the "मैं असलियत को झुठला रहा हूँ ..........."

  1. Suman says:

    nice

  2. gooood yaar

  3. बहुत बढीया!!!
    संघर्षों से ही मिलता है किनारा
    तूफानों से फिर क्यों मैं घबरा रहा हूँ ...

  4. ab kissi publisher ko dhoondnaa padega!!! very nice... very inspiring!!

  5. RINKI says:

    जब से दुनिया आई है समझ मैं
    दुनिया से में दूरी बढ़ा रहा हूँ.
    best lines

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