SWATANTRA...SOCH

All religions, arts and sciences are branches of the same tree. All these aspirations are directed toward ennobling man's life, lifting it from the sphere of mere physical existence and leading the individual towards freedom.No one should negotiate their dreams. Dreams must be free to flee and fly high.

  • About This Blog

    This blog contains poems written by me on different topics and with different essence everytime, along with photographs shot by me during various trips in India and UK containing macros, sceneries, urban and rural shots, I hope this blog will serve you with a range of variety and you will enjoy my work.
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बड़े ही दिन हुए मिले

की बात भी हुई नहीं। .... 
हम तो पूछते, रहे
पर आप ही मिले नहीं ....
जो मिल गए हैं आज तो
क़सर न रह जाए कहीं  …
शब्द तो बहुत हैं
पर आवाज़ ढूंढ  लीजिये। …
अपने लिए भी कोई
हमराज़ ढूंढ लीजिये।

कुछ हाल-ऐ-बयान ही करें

कुछ रंग पुराने भरें  ....
अगर है, फिर भी क़श्मक़श
तो खाली ज़ाम ही भरें ....
गुज़रे सालों से पूछिये ज़रा
छूटे हैं वो हसीं लम्हे कहाँ? …
थे जिस पे, आखिरी निशान 
वो क़िताब,  ढूंढ लीजिये ....
अपने लिए भी कोई
हमराज़ ढूंढ लीजिये।

वो आरज़ू , वो हौसले

वो दूर होते,  फ़ासले  ....
वो शाम की रुबाइयाँ
वो मनचली पुरवाइयां  ....
अभी भी गूंजते हैं जो
वो गीत वो शहनाइयां।  …
आलम तो बन ही जाएगा
बस अंदाज़ ढूंढ लीजिये  ……
अपने लिए भी कोई
हमराज़ ढूंढ लीजिये।

अभी भी वक़्त है हुज़ूर

हालात को करिए  क़ुबूल  ....
इन हसरतों की ग़ुलामी
से भी बड़ी है ज़िंदगानी  ....
यूँ आसमां की होड़ में
ज़मीन को ना छोड़िये  ....
ख़ुश रहे जो,  हर हाल में
वो मिज़ाज़ ढूंढ लीजिये  …
अपने लिए भी कोई
हमराज़ ढूंढ लीजिये।

ये ज़िन्दगी की शाम है  …

अब आपको क्या काम है?
हमने तो चुन लिया है घर …
आपका क्या  इंतज़ाम  है ?
चले थे जिनको छोड़ कर
फिर मिल गए इस मोड़ पर  …
एहसास की कमी नहीं
ज़ज़्बात ढूंढ लीजिये  …
अपने लिए भी कोई
हमराज़ ढूंढ लीजिये।

बहुत मुश्किल है.....

Posted by Priyanka Telang On 1:38 PM 0 comments



बहुत मुश्किल है मोहब्बत में.……
कभी जीना कभी मरना। ....
बड़ी शिददत से देखना तुझे ....
फ़िर एक आह भर लेना।

तेरा वो जान बूझ कर …
मुझे नज़रअंदाज़  कर  देना।
और मेरे दिल मैं सवालों के  …
कई सैलाब उमड़ना।

तेरा.. मेरे बारे मैं सोच कर ....
वक़्त ... ज़ाया नहीं करना
और मेरा... कोई भी लम्हा  …
तेरे बगैर.. ज़ाया नहीं होना।

वो तरस खा कर... कभी मेरी हालत पर …
तेरा अफ़सोस... कर लेना ।
वो हर बदलाव पर... तेरे  …।
मेरा... चुपके से रो लेना।

बिना दुशवारियों के..  वो तेरा
मुझसे बढ़ा लेना फासले  ....
मेरा... भुलाने  की कश्मकश में भी …
तुझ ही को याद कर लेना।

शब्-ए -फ़रहत  बिताना तेरा …
 किन्हीं और बाँहों में
और मेरा रात भर एकटक ...
खाली... दीवार को तकना

बड़ा मुश्किल है मोहब्बत में ...
कभी जीना कभी मरना।
वो तेरा बच के निकल लेना ....
मेरा बर्बाद हो जाना।



शब्-ए -फ़रहत - nights of pleasure




फिर से वक़्त ने करवट ली है … 
फिर मेरे दिल का हाल वही है …… 
मेरे हौसलों पे... तो मुझको यकीं हैं 
पर क्या खो गया है?.…ये किस की कमी है ?
क्या साथी कोई छूट गया है ?
अन्दर से कुछ टूट गया है। 


हुआ कोई यूँ बिन इजाज़त के दाखिल। ….  
जो मुमकिन नहीं था.….  वो कर गया हासिल 
हिजाक़त पे मेरी … परदे गिरा के …
खुली आँखों से मुझको …  सपने दिखा के 
कोई अरमानों को लूट गया है। 
अन्दर से कुछ टूट गया है। 


सफ़र कट रहा था तन्हाई मैं भी.… 
उस राही ने क्यूँ? …  मुझको आवाज़ दे दी। 
सूने पड़े दिल मैं मेरे  …. हलचल मचा के 
मेरे ज़हन मैं अपनी … यादें बसा के 
वो लगता है.… सब भूल गया है। 
अन्दर से कुछ टूट गया है। 


राह-ऐ-दहर पे.…  मैं बढ़ तो गया हूँ। 
कोई... मंजिल नहीं है, जहाँ को चला हूँ। 
मैंने दर्द-ऐ-ग़म से, भर के … वक़्त खाली
अपनी बेगानों में भी... जगह बना ली। 
पर अपना कोई रूठ गया है 
अन्दर से कुछ टूट गया है। 


ना मैंने शिकायत की ... रब से कोई 
पर सांसों में अब भी... क्यूँ बसता है वो ही?
काबू में कर के.... अपनी हसरतों को ...
मैंने हंसी... से.... सजाया, लबों को...
पर आँखों से सब फूट गया है ...
अन्दर से कुछ टूट गया है। 


हिजाक़त  - wisdom






तेरी आँखों के चमकते मोती !
मुझे फिर एक बार डुबाने  चले हैं ...

क्या ये जानते नहीं मेरी हालत?
जो मुझे फिर से आज़माने चले हैं ..

बड़ी ही कशमकश में दिल है ...कैसे बहले ?
की वो हम पे दिल-ओ-जान लुटाने चले हैं। ...

ग़ज़ब ये इत्तेफाक़ है की तुझे याद भी आये हम ..तब
जब खुद को ... तेरी नज़रों से छुपाने चले हैं  ...

ये खुशबू जो तुम्हे अब बेक़रार करती है।
वो जूनून है .... जिसपे परवाने जले हैं ....

तू जिसकी जुस्तुजू  में .... बस कुछ ही पलों से है ..
हम उसे ... त़ाउम्र सम्हाले चले हैं ...

बड़ा हसीन शौक है ..मुहब्बत  मेरे हुज़ूर ...
कई सालों  से ... इस सफ़र पे ज़माने चले हैं ...

जो पहल कर ही दी है तुमने ... तो बस इतना समझ लो!
बड़े बर्बाद हुए हैं ...जो भी निभाने  चले हैं !

बहुत आजाब  है ...ग़म-ऐ-फुरक़त  से उबरना
कई मुददतों ...  से हम भी भुलाने चले हैं !

कल क्या होना है ...क्या नहीं होगा ?
वो क्या सोचेंगे ..जो खुद तक़दीर  बनाने चले हैं !






कुछ  बीती  हुई  यादें  हैं
कैसे  मैं  जला  दूँ ?
कुछ  टूटे  हुए  वादे  हैं
कैसे  मैं  निभा  दूँ ?

में  मिटा  भी  दूँ  अतीत  
पर क्या  कभी  तुम  ना पूछोगे ?..
जो  कुछ  मुझ  पे  बीती  है ..
तुम  क्या  ही  समझोगे ?

मैं  गिर गिर  के  सम्हला  हूँ ..
किस  तरह  राहें सजा  दूँ ?

जिस  लिए  खामोश  हुआ  था
वो  राज़  कैसे  बता  दूँ ?

मैं   जिस  मंजिल  को  बढ़  रहा  हूँ
क्या  तुम  साथ  चलोगे ?
अगर  राहें  भटक  गयीं
तो  क्या  फिर  से  मिलोगे ?

तुम  मेरी  ज़रूरत  हो ..
कैसे  ये  जता दूँ ?

में  डरता  नहीं  हूँ  पर
तुम्हे  क्या  क्या  मैं  बता  दूँ ?...

नहीं  कहता  तो  संग-ऐ दिल..
जो  कह  दूँ  तो  रुसवा  हूँ
अजब  कशमकश  में  उलझा  हूँ
ये  किस  मंजिल  पे  पहुंचा  हूँ

अभी  हालात नहीं  हैं ..
कि जज़्बात बयान  हों
कभी  फुर्सत  मैं  तुम  मिलो  तो ..
ये  समंदर भी  खला  दूँ

तू  मेरी  हस्ती  की  वजह  है
जो  तू  नहीं  तो  मैं  नहीं
तुम  मुझे  हासिल  नहीं  तो  क्या
मैं तो  तुमसे  जुदा  नहीं ...

कोई  अफ़सोस  तो  नहीं  है
पर  आसां  भी  नहीं  कि
अपनी  हकीकत  को  भुला  दूँ

जो  सज़ा  मेरे  लिए  लिखी है
वो  तुम्हे  कैसे  सुना दूँ ?



हैं  बेसब्र  मेरी  रातें ...ये  दिन  बहुत  बड़े  हैं ...
मैं  तो  वहीँ  खड़ा  हूँ ..पर  आप  चल  पड़े  हैं ....


एक   राह  पे  चले  थे ..मंजिलें  जुदा  थी  अपनी ...
ये  वक़्त  क्यूँ  है  ठहरा  जो  हम  बिछड़  गए  हैं ...


जो  हर  शाम  गूंजते  थे ... वो  कहकहे  थे  अपने
क्यूँ  खामोश  हो  गया  मैं  ये  आप  समझते  हैं ....


एक  वक़्त  ऐसा  भी  था ... कि  अपनी  भी  दास्तान  थी ....
अब  जो  ढूंढा  है  फिर  सहर  को ...तो  कुछ  बिखरे  लम्हे  मिले  हैं .......


लगता  है  कुछ  तो  अपनी .. अनबन  है  ख्वाइशों   से
समझा  था  जिन्हें  अपना .. वो  औरों  को  हो  चले  हैं ....


अभी  भी  सुलगती  हैं  ..वो  आरज़ू ... वो  तमन्नाएं ...
ये  कैसी  हसरतें  हैं ...ये  कैसे  सिलसिले  हैं ....


जिस दिन  तुझे  मेरी ... ख़ामोशी  सुनाई देगी  
उस दिन ये दुनिया ... कुछ और  ही दिखाई देगी 


बेआरजू  होके  निकला  हूँ .. तेरे  दर  से 
हर  आहट ... मेरे  बिलखते  अरमानों  की  दुहाई  देगी 


मैं अपने  आंसुओं  को ... पीता  रहूँगा  हरदम 
पर मेरी मुस्कराहट में ..... उदासी दिखाई  देगी 


तुने  मुझे  देखा  भी  नहीं ...करीब  ही  था  मैं 
मेरे  टूटे  हुए .. दिल  की  आवाज़  तुझे  क्या  सुनाई  देगी 


बहुत  दूर  चला  जा  चुका  हूँगा  मैं..  जबतलक 
तेरी  रूह....  मेरा  नाम  पुकारेगी ... सदा  देगी !


जिस दश्त  से  तू  गुज़रे....  उसे  फूलों  से  सजा  दूँ
ये  आग  जो  भड़की  है....  उसे  और  लगा  दूँ


तू  आज  मुझे  जी  भर के..... देख लेने  दे  ज़रा
इस  नज़र  में  वो  असर  है...  कि  पत्थर पिघला  दूँ


दुनिया  की फिकर ना  कर....  ये  दुनिया तो... भरम  है
जो थाम ले तू हाथ मेरा ...,में अपनी अलग एक.... दुनिया ही  बसा  दूँ


पेशानियों  पे  लिखा है............ गर  नसीब तो
जो तुझसे..  जुदा  करे...  वो  लकीर  मिटा  दूँ


कौन  कहता  है  कि...  तनहाई  का  ताल्लुक  है  ग़म  से
तेरी  यादों  से...  तनहाई  की  महफिलें  सजा दूँ


ज़ाया  हुआ  है..  बहुत  वक़्त...  तेरी  आरज़ू  में  ऐ-हबीब
हर एक  पल  जो  बाक़ी  है..  तेरे  सदके...  मैं  लुटा  दूँ



तेरे  नाम  से  वा-बस्ताह  मुझे  मानने  लगे  हैं ..
इस  शहर  के  लोग .. अब  मुझे  पहचानने  लगे  हैं ...

मेरे  चेहरे  की  रौनक  में. .. तेरा  नूर  दीखता  है ...
ये  क्या  हुआ  है  मुझको ...ये  कैसा  करिश्मा  है ..

निगाहों  में  बस  गया  है ...चुपके  से  अक्स  तेरा ...
मुझसे  जुदा  हुआ  है ... हौले  से  सुकून  मेरा ...

अब  लोग  पूछते  हैं ...सवाल  कई  मुझसे ...
हर  बात  जोड़ते  हैं .. मेरी  बेकली  की  तुझसे ....

कैसा  अजब  नशा  है...अब  होश  ही  कहाँ  है ...
दास्तान  मेरे  दिल  की ...जानता  मेरा  खुदा  है ...

दीवानगी  ये  तेरी ...बन  गयी  है  उलझन  मेरी ..
जी  चाहता  है  फ़ना  होना ..मोहब्बत  में  सनम  तेरी ...

इस  बेखुदी  में  सब  कुछ ... हम  हारने  लगे  हैं
इस  शहर  के  लोग .. अब  मुझे  पहचानने  लगे  हैं ...


वा-बस्ताह  - attached,bound together
बेकली - Restlessness


यूँ  तो  कट  जाएगी 
ज़िन्दगी  की .. ये  डगर
तू  जो  मिल  जाए ... अगर
होगा  हसीन ... ये  सफ़र


कुछ  भी  आता...नहीं 
तेरे...  सिवा ... मुझको  नज़र
हो  गया  है...  इस  कदर 
रूह पर.... तेरा असर


थाम  लो  जो .. हाथ  तुम
फिर  मुझे ... किसका  है  डर
तेरे  ही  दिल  में रहूँ
नहीं  चाहता  .. कोई  नगर


अब  नहीं  है .. कोई  भी  
ग़म  मुझे .. ऐ  हमसफ़र 
जितनी  भी  खुशियाँ  मिलें 
कर  दूँ  सब .. तुझ  पे  नज़र ...


जब  भी  मांगूं...  दुआ
हाथ  अपने ..... जोड़  कर
में  यही  सजदा  करूँ
चाहूं..... तुझे ही  उम्र  भर!


तेरे  साथ  ज़िन्दगी  बिताने  कि  तमन्ना  है..........
तुझे  दिल में बसाने  की  तमन्ना  है..........


फूलों  में  रंग  तो  भर  दिए .... बहार  ने
अब  उन्हें  और ... महकाने  की  तमन्ना  है .....


यूँ  तो  होश  खोये  हैं ... कई  बार  मय-कदा   में.......
अब  तेरी  आँखों  में .. खो  जाने  की  तमन्ना  है


बहुत  हसरतें  तो  नहीं ..... रखता हूँ मैं दिल  में........
बस  एक  शाम  तेरे  पहलू  में  बिताने  की  तमन्ना  है...........


रातें  गुजारी  हैं  कई ... बेदारी  में हमने...........
एक  बार  तेरी बाहों में...  होश  गंवाने  की  तमन्ना  है ........


ना  दुनिया  की  गरज  है ... ना  अमीरी  की  इक्तेज़ा.......
कुछ  और नहीं बस .... तुझे  पाने  की  तमन्ना  है..........


ज़िन्दगी  बीत  रही  है .....मौत  भी  आएगी  एक  दिन......
क़ज़ा  के  बाद  भी  तुझे ...चाहने  की तमन्ना  है ......


Glossary
 बेदारी -  Alertness, Awakening, Rousing, Wakefulness, 
इक्तेज़ा -  Requirement, Need, Demand
क़ज़ा -   Destiny, Death, Fate, Jurisdiction, Judgement


टूटा  हुआ  दिल  और  भी  दुखाते  हैं 
क्यों  लोग  इस  क़दर  ज़ुल्म  ढाते  हैं ..........


जिस  कि  तकदीर  ज़माने  ने  लिखी
जिसकी  मोहब्बत  को  मंजिल  ना  मिली ..............
उस  कि  कहानी  को  सरे -आम  ये  दोहराते  हैं
क्यों  लोग  इस  क़दर  ज़ुल्म  ढाते  हैं ..........


बस  यही  एक  खता  कि  हमने
किसीकी  आरज़ू  में  ज़िन्दगी  बिता  दी  हमने
अब  हमें  कनखियों  से  देख  मुस्कुराते  हैं
क्यों  लोग  इस  क़दर  ज़ुल्म  ढाते  हैं ..........


कतरा  कतरा  तडपा  है  जो  कुछ  पाने  को
वो  क्या  बदल  पायेगा  ज़माने  को
बदनसीब  कि  किस्मत  को  आजमाते  हैं ................
क्यों  लोग  इस  क़दर  ज़ुल्म  ढाते  हैं ..........


कुछ  इस  तरह  मोहब्बत  को  सज़ा  दी  हमने
दिल  के  हर  अरमान  को  आग  लगा  दी  हमने
ये  दास्तान  फ़रिश्ते  भी  कहते  हुए  घबराते  हैं ........
क्यों  लोग  इस  क़दर  ज़ुल्म  ढाते  हैं .............


ख्वाबों से आ गयी थी 
वो हकीकत के धरातल पे......
अब देख कर में उसको
क्या ओरों को देख पाता....

कोमल थी कामिनी  सी 
धवल थी चांदनी सी ....
दीदार पा के उसका कोई 
और कुछ ना चाहता ......

कुछ बात तो थी उसमें 
कैसे में भूल जाता....
कुछ बात ना थी मुझमे 
जो उसको याद आता ........

खुदा कि इनायत थी ,
जो उसके साथ बिताये पल...... 
मिलती ना झलक उसकी
तो मैं जीते जी मर  जाता ..........

वैसे तो हसीनों की 
जहाँ में कमी नहीं है
पर वो शोखियाँ, वो नखरे
ओरों  में  कहाँ  पाता ............


मुश्किलों  से  खेलना  आसान  हो  गया
तू  मिल  गया  मुझको  तो  मेरा  नाम  हो  गया


दुनिया  ने  किये  थे  मुझ  पे  सितम  कई
रक़ीब  भी  काफी  थे , दुश्मन  भी  थे  कई
महबूब  तेरा  आँचल.....  आया  जो  हाथ  में.....
सारा  ज़माना  जैसे .. मेरा गुलाम हो  गया
तू  मिल  गया  मुझको  तो  मेरा  नाम  हो  गया .....


तू  सच  है  या  है  मेरा  हसीन  ख्वाब  कोई
बिस्मिल  है  मेरा  या  फिर  दिल  का  भरम  है  कोई
आलम  है  बेखुदी  का,.. मौसम  है  दिल्लगी  का........
चाहत  में  तेरी  चर्चा  तमाम  हो  गया
तू  मिल  गया  मुझको  तो  मेरा  नाम  हो  गया .....


रंग  जैसे  संगेमरमर  ये  तीर  नज़र  उस  पर
तेरी  ये  अदा  दिलबर, करती  है असर  दिल  पर
हालत  संवर  गयी  है .. तबियत  मचल  गयी  है......
तेरी  एक  निगाह  में  सारा  कमाल  हो  गया
तू  मिल  गया  मुझको  तो  मेरा  नाम  हो  गया .....


उल्फत  में  तेरी  खोया  तो  फिर  कभी  ना  रोया
किस्मत  बदल  गयी  है  जब  से  जुल्फों  में  तेरी  सोया
ऐ  हमदम  अब  तेरे  बिन .... कटते  नहीं  हैं  ये  दिन
तेरी  आरज़ू  में सब  कुछ  कुर्बान  हो  गया
तू  मिल  गया  मुझको  तो  मेरा  नाम  हो  गया .....


वो  हमारे  दिल  मैं  यूँ  उतरते  चले  गए 
हालात  जो  नाज़ुक  थे  बिगड़ते  चले  गए 
छाया  खुमार  सा  निगाहों पे इस कदर 
क़यामत  पे  था  खड़ा मैं ना  आया  मुझे  नज़र 
जब  तक  सम्हाले  होश  बहुत  देर  हो  गयी 
ज़िन्दगी  ये  मेरी  मौत  के  बिस्तर  पे  सो  गयी.......... 


(After Death...)

पहुंचा  खुदा  के  दर  पे  तो  हम-नज़र  हुआ 
क्यों  मेरे  साथ  ही, ऐसा  गज़ब  हुआ 
पुछा  खुदा  से  मैंने  क्या  कुसूर  था  मेरा ?
वो बोला  प्यार  करने  का  तुझे  मिला  सिला 
यह  जन्नत  है  तेरे  करम  का  इनाम-ऐ-बन्दे
वरना कहाँ होता  है  नसीब, ओरों  को ,ये  खुदा .........


मेहताब में फूल  खिल  गया  जैसे
मुझे  ओ  हमदम  तू  मिल  गया  ऐसे




शोखियाँ  घटाओं की  अब बेढंग  लगा  करती  हैं
गुलशन  मैं  कलियाँ  भी  बेरंग  लगा  करती  हैं
सागर  की  मौजों  मैं अब  वो  मज़ा  नहीं
तेरे  आने  से  इनका  नूर  छिन गया  जैसे




चांदनी  भी  हमसे  नज़र  चुराती  है
मेरे  महबूब  के  हुस्न  से  शर्माती  है
चाँद  भी  अब  बुझा  सा  लगता  है 
उसकी  रौनक  को  तुने  चुरा  लिया  जैसे




तेरी  खुशबू  मैं  ऐसी  है  कशिश
जैसे  उगते  हुए  सूरज  की  तपिश
हवा  भी  अब  ना  बलखाती  है
तेरी  जुल्फों  से  जलती  हो  जैसे




मेरी  हालत  है  उस  परवाने  सी
शमा  की  आस  किया करता  है
लौ  को   देख  मचलता है  ऐसे
कोई  बिछडा  हुआ  मिल  गया  जैसे



जो फिर ना लौट के आएगा 
हम उसकी तमन्ना करते हैं .............
ना इश्क मैं पूरे डूबे हैं 
ना काम ही किया करते हैं .......................
                                                                                                               
अपनी  यह  कहानी  किसको  कहें ?
क्या  लोगों  को  समझाएं  हम ?
जो खुद ना समझ  मैं  आई  हैं 
वो ओरों  को  बताया  करते  हैं .......................

ना इश्क मैं पूरे डूबे हैं 
ना काम ही किया करते हैं .......................

हम  ने भी  क्या  क्या  काम  किये 
उनकी  एक  तमन्ना  पर  लाखों  अरमां कुर्बान  किये 
अब  उन  लाखों  अरमानों  की 
हम बैठ के गिनती  करते  हैं .......................
  
ना इश्क मैं पूरे डूबे हैं 
ना काम ही किया करते हैं .......................
  
जब  तुमने  हमको  सदायें  दी 
हम  काम  मैं  ही  मशगूल  रहे
जो  अब  ना  कभी  फिर  गूंजेंगी 
उन  आवाजों  को  पुकारा  करते  हैं .......................
  
ना इश्क मैं पूरे डूबे हैं 
ना काम ही किया करते हैं .....................

हमने  भी  सारे  जतन  किये 
महफिल  से  मैखाने  तक  गए 
जो  ख़ाक  मैं  मिलकर  भी  ना  बुझी 
उस  आग को  ठंडा  करते  हैं ...................

ना इश्क मैं पूरे डूबे हैं 
ना काम ही किया करते हैं .......................

अपनी चढ़ती  बीमारी  का  हमने 
इस  तरह  इलाज़ किया 
जिन  पे  था  तुम्हारा  नाम  लिखा 
उन  पन्नो  को  जलाया  करते  हैं ..............

ना इश्क मैं पूरे डूबे हैं 
ना काम ही किया करते हैं .......................


जीने की तमन्ना थी, जो तुम साथ मैं लेकर चले गए
जो बात जुबां से कहनी थी आँखों से कह के चले गए


जब छोडा है मुझको तनहा तो ख़्वाबों मैं क्यूँ आते हो
दिन रात मेरी खामोशी का किसलिए मज़ाक उडाते हो


जो राज़ छुपाया था हमने तुम समाचार बनाके चले गए
हमने तोः पायी रुसवाई तुम नाम कमा कर चले गए


अपने दिल के बिखरे अरमान हमने अश्कों से धुलवाए हैं
तुम क्या समझो इस आलम को अपने भी काम ना आये हैं


जो हम से ताल्लुक रखते थे वो भी कतरा के चले गए
जीवन मैं अँधेरा छाया है उजाले तो कभी के चले गए





































मिलन के पथ पे चले थे..विरह* की भी रात होगी…

दूर जाकर भी कभी..इस मधुर क्षण* की बात होगी..
साथ बीते मित्रता के पल कभी जब याद होंगे…
हर्ष के कुछ कण मिलेंगे और कुछ अवसाद* होंगे
साथ बीता यह समय बन जाएगा संबल* हमारा
जान लूं परिचय तुम्हारा....

कौन कब तक ज़िन्दगी मैं साध* लेकर चल सका है
जो दिया है नियति ने वो ही सभी को मिल सका है…
मैं भला क्या हूँ…जो चिर मिलन का सपना संजोउन..
श्वांस की बिखरी लड़ी को किस तरह से मैं पिरोउं
आज से हर स्वप्न मैं, में नाम लिख दूँगा तुम्हारा
जान लूं परिचय तुम्हारा…

प्रेम जीवन की सहज अभिव्यक्ति बन के ही पला है…
सृष्टि के आरम्भ से ही चल पड़ा यह सिलसिला है..
हो जहाँ बंधन वहीँ तो मुक्ति का आभास होगा..
दूरियां ना हों तो कैसे विरह का एहसास होगा…
चल पड़ी है लहर तब तो मिल ही जाएगा किनारा…
जान लूं परिचय तुम्हारा……

बहुत सुंदर दीखते हैं गगन के शत शत सितारे…
सच नही होते मगर, इस ज़िन्दगी के स्वप्न सारे…
दूर तक चल के भी राहों में अकेले छूट जाते..
कौन जाने किस तरह से पाश मन के टूट जाते…
मन अकेला रह गया है साथ है संसार सारा…
जान लूं परिचय तुम्हारा…

Written by :
डॉ निधि तेलंग (Mom)
Glossary : विरह – Separation; नियति – destiny; क्षण – moment;
अवसाद – sorrow; संबल - motivation; श्वांस - breath